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रविवार, 8 नवंबर 2009

फतवा जारी करने वालो तुम ने क्या सोचा है




फतवा जारी करने वालो तुम ने क्या ये सोचा है

फतवा जारी करने से वन्देमातरम नहीं होता है

नहीं अक्ल है तुम में इतनी की इस को तुम समझ पाते

वरना वन्देमातरम को गाने से तुम ही परेहज न कर पाते

तुम मजब्हियो ने क्यो इस को ईश वन्दना से जोड़ा है

फतवा जारी करके तुम ने क्यो माँ की ममता को भेदा है

क्यों नही फतवा जारी करके तुम अनुपालन इस का करते हो

क्यो बार-बार शीश झुकाकर माँ का वंदन करते हो

अर्थ पता नहीं वन्देमातरम का फतवा जारी कर देते हो

तुम मह्ज्बी स्वार्थी होकर सब को गुमरहा कर देते हो

वन्देमातरम नहीं ईश वंदना ये तो मात्रभूमि का वंदन है

अपनी-अपनी ईश वंदना में करते हम इस का वंदन है

शीश झुकाते है हम जिसको वंदन उसका होता है

हम शीश झुकाकर २ पहर वंदन इसका करते है

तुम तो शीश झुकाके ५ याम वंदन इसका करते हो

जब तुम वंदन इसका करते तो क्यो फतवा जरी करते हो ?

तुम महजबी स्वार्थी होकर क्यो सब को गुमरहा करते हो?

प्यार नहीं है तुम्हे मात्रभूमि से तो क्यो तुम इस पर रहते हो

इंतकाल होने पर अपने क्यो इस की गोद में सोते हो

अब तो छोड़ो तुम मजह्बियो अपने स्वार्थ के लालच को

फतवा जारी करने से पहले समझो उस की भाषा को

फतवा-फतवा तुम करते हो क्यो नही फतवा जारी कर देते

अशिक्षित हो जो तुम सारे क्यो नही शिक्षा ग्रहण करते

फतवा जारी करना है तो जनसँख्या नियंत्रण का कर डालो

फतवा जारी कर के तुम अपना स्वार्थ मिटा डालो

फतवा जारी करदो शिक्षा का की शिक्षित हो सब नर-नारी

शिक्षित होकर सब जन जाने मात्रभूमि की वंदना सारी

ये बात समझ न आई तुम्हारे तो फ़िर तुम समझ लेना

फतवा-फतवा जो तुम करते हो उस को जारी हम कर देंगे

इंतकाल पर मात्रभूमि में तुम को पनाह भी हम न लेने देंगे



2 टिप्‍पणियां:

  1. जैसे ही मैंने समाचार पत्र में और दूरदर्शन में भी समाचार पढ़ा था
    मेरे मन में भी खलबली मच गयी थी और उसी समय कोसा था
    देश के कर्णधारों को भी जो इस प्रस्ताव को अपनी मौन सहमती प्रदान
    कर रहे थे बहुत बढ़िया सन्देश सबको जाना चाहिए

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