Text selection Lock by Hindi Blog Tips

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

मेरा भारत

ये कैसा भारत है मेरा देख के मन भी रोता है

रक्षा करने वालो के हाथो ही क्यो ये बेचा जाता है


रक्षक ही क्यो इसके सारे भक्षक बनने लगते है

झोली भरने की खातिर अपनी इस का बंटवारा करने लगते है

ये कैसा भारत है..................................

गाँधी जी ने क्या अपने जीवन में ऐसे भारत का ही सपना देखा था

ऐसे भारत की खातिर ही क्या भगत सिंह ने फंदा चूमा था

चोट खाई थी लाल-बाल ने उनको क्या ये मालूम था

ऐसा होगा भारत मेरा तुम ने ही क्या ये सोचा था

ये कैसा भारत है..................................

बहती थी दुग्धार जहाँ पर अब रक्त धार क्यो है बह रही

उड़ती थी जो सोने की चिड़िया वो कहाँ पर है अब सो रही

होता था जहाँ सत्कार सभी का क्या वो ये ही भारत था

संस्क्रती थी जो भारत की सोचो जरा वो कहाँ गयी

ये कैसा भारत है..................................

नक्शा भारत का याद नही पर मूरत अपनी लगवा रहे

लगा-लगा कर मूरत अपनी क्यो शहीदों को हे वो भुला रहे

जा-जा कर के गावों में वो क्यो अब है डेरा डाल रहे

पर गले में फंदा दुश्मन के क्यो अब भी ना वो डाल रहें

ये कैसा भारत है..................................

क्यो अपनी कुर्सी की खातिर वो भारत को है खो रहे

क्यो भारत के नेता जाग के अब भी सो रहे

क्या भारत से इनका नाता अब कुछ भी रहा नही

देख के इन नेताओ को मेरा मन तो ये ही कहता है

ये कैसा भारत है..................................

गाल बजाते फिरते है करते कुछ और नही

शहादत पर वो सैनिक की गाल बजाते जाते है

उसकी माता या विधवा से ये झूटे वादे करके आते है

क्यो अपने झूटे वादों से ये उनके दुःख को हरना चाहते है

ये कैसा भारत है..................................

जब तक उसकी अर्थी उठती जब तक वादे याद है

पंचतत्व में मिलते ही उसके होते ये नाग साफ है

ऐसे नागो के बारे में तुम ने अब क्या सोचा है

ये कैसा भारत है..................................



1 टिप्पणी:

  1. VANDE MATRAM
    AAJ JO STITHI BHARAT DESH KI HAI US SE TO AISA LAGTA HAI KI AAPNE VALE KUCH VARSHO ME YAHAN KI JANSANKHYA SABSE AADHIK HO JAYEGI. PAR KYA JANSANKHYA BADHNE SE TAKAT BHI BADHTI HAI JI NAHI BALKI TAKAT KAM HO JATI HAI. AAJ HAMARE ANDAR KA KHUN THANDA HO GAYA HAI JISE KI VAPAS HAME JAGANE KI AUR USE GARM KARNE KI JARURAT HAI. KYA AAP YE CHAHTE HAIN KI HAM JAHAN PAIDA HUVE VAHAN BINA KUCH KIYE HI MAR JAYE. AGAR AAJ HAM IS BHARAT DESH ME HAI TO VO ESLIYE HI HAIN KI HAME KUCH KARNA HAI AUR APNE DESH K LIYE KARNA HAI. HAME APNE DESH PAR GARV HONE CHAHIYE, HAME APNI BHASHA PAR GARV HONA CHAHIYE. HAME APNE DESH AUR BHASHA KO AAGE BADHANA HAI PHIR CHAHE USKE LIYE HAME KUCH BHI KYU N KARNA PADE.

    ZINDAGI TO HO SAKTA HAI AAPKO VAPAS MIL JAYE PAR KYA YE BHARAT DESH KYA AAP SADEV MIL SAKTA HAI - VICHAR KARNE KI JARURAT HAI - EK KOSHISH HI SAHI......Samik Rana..!

    जवाब देंहटाएं