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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2009

मै हूँ एक नन्ही सी जान

मै हूँ एक नन्ही सी जान

मै हूँ एक नन्ही सी जान,मासूम सी प्यारी सी

परी जैसी सुंदर पर संसार में आने को विचलित हूँ

लेकिन मै मुकदर की मारी हूँ या विज्ञान की

या जगत में फैली बुराई की जो आने से पहले ही हो गयी पराई

मै हूँ एक नन्ही सी जान...........................

मै भी देखना चाहती थी योवन अपना

पर मै तो नसीब ना कर सकी अपनी आखों का उजियाला भी

मै भी चाहती थी खुलकर हँसना संसार में

पर मै तो रो भी ना सकी इस संसार में

मै हूँ एक नन्ही सी जान...........................

मै भी उड़ना चाहती थी अन्तरिक्ष में

पर मै तो घुटनों के बल भी चल ना सकी

बैठना चाहती थी मै भी डोली में

पर मै तो अर्थी भी नसीब कर ना सकी

मै हूँ एक नन्ही सी जान...........................

समझती थी जिसको मै अपना वो ही पराई हो गयी

दुसरो की बातो मै आकर चुप निंद्रा मै सो गयी

क्यो नही समझता कोई मेरी इस अभिलाषा को

मै हूँ एक नन्ही सी जान...........................

दर्जा मिला था जिस को भगवन का

वो ही दरिंदे हो गये

लड़ते थे जो मोत से

वो ही मोत के साथी हो गये

क्यो नही समझते वो मेरे अरमानो को

मै हूँ एक नन्ही सी जान...........................

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